Makar Sankranti : जानिये साल 2022 मे किस दिन मनाया जाएगा मकर संक्रांति

makar Sankranti festival in hindi

हमारा देश भारत (इंडिया) सच में विविधता का देश है, इंडिया में बहुत सारे त्योहार सेलिब्रेट किये जाते है, अगर हम अपना कैलेंडर उठा कर देखे तो, हर दूसरे या तीसरे दिन कोई न कोई त्योहार होता ही है, आज हम आपको बताने वाले है मकर संक्रांति त्योहार के बारे में, इस त्यौहार के बारे में आपने जरूर सुना होगा, अगर नहीं सुना है तो आज मकर संक्रांति के बारे में सभी और सही जानकारी आपको देंगे।

वैसे तो यह त्यौहार ( Makar Sankranti ) एक मौसमी त्यौहार है, जो कि मौसम के बदलने पर मनाया जाता है, इस त्यौहार को पूरे भारतवर्ष के हिन्दू और सिख समुदाय, और पूरी दुनिया के हिन्दू और सिख समुदाय के लोग मनाते है, मकर संक्रांति त्यौहार को एक विज्ञानी त्यौहार भी कहते है, क्योंकि इस त्यौहार के पीछे एक बहुत ही बड़ा वैज्ञानिक कारण है कि इस दिन हमारे सौरमण्डल में सूर्य और पृथ्वी की दशाएं बदल जाती है, कहने का मतलब है कि आज के दिन यानी कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य अपनी पिछली राशि छोड़कर मकर राशि में entry करते है, जिसकी वजह से दिन लम्बा (long) ओर राते छोटी हो जाती है।

ऐसा साल में 12 बार होता है लेकिन यह सबसे दुर्लभ संक्रांति होती है क्योंकि इसी की वजह से पूरा मौसम बदल जाता है।

मकर संक्रांति मनाने के पीछे की कहनी

हमारे वेद और पुराणों के अनुसार मकर संक्रांति की एक कथा बहुत ही प्रचलित है, इस कथा के अनुसार मकर संक्रांति के दिन लॉर्ड सूर्य अपने बेटे शनिदेव के पास मिलने के लिए जाते है, और इसी टाइम शनिदेव मकर राशि पर बैठे हुए होते है यानी कि शनि देव का प्रभाव मकर राशि पर बना होता है, और इसी समय सूर्य देव भी इसी राशि में एंट्री कर लेते है, इसीलिए इस त्योहार के दिन सभी पिता लोग अपने अपने बेटों से मिलने जाते है, अगर पुत्र साथ रहता है तो पिता अपने सभी बेटो को आशीर्वाद देते है। जिससे पिता और बेटो के रिलेशन में सुधार आता है।

इसके बाद दूसरी स्टोरी महाभारत की है जब गंगा जी के बेटे भीष्म पितामह को अर्जुन ने तीरों की शैया यानी कि तीरों का बेड बना कर उनके शरीर को भेद दिया था, लेकिन भीष्म जी को अपनी माँ गंगा जी से इच्छा मृत्यु का वरदान मिला हुआ इसीलिए भीष्म पितामह ने इच्छा करी कि, वह पूरा महाभारत का युद्ध देखकर की सूर्य के उत्तरायण होने पर प्राण त्याग करेगें, और जब 18 दिन के बाद महाभारत की लड़ाई खत्म हुई तब भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्याग दिए थे।

तबसे यह मान्यता है कि जो भी सूर्य के उत्तरायण होने पर प्राण त्याग करता है, उसके लिए स्वर्ग (heaven) के दरवाजे खुले हुए रहते है।

मकर संक्रांति का त्योहार क्यों मनाया जाता है ?

दोस्तो मकर संक्रांति का त्योहार हर साल 14 और 15 जनवरी को मनाया जाता है, यह डेट तिथियों के हिसाब से बदलती रहती है, कभी कभी मकर संक्रांति 

2 दिन की भी मनाई जाती है, इसी दिन भगवान सूर्य (sun) मकर राशि मे आते है, और उनका झुकाव उत्तर दिशा की ओर हो जाता है, इसी दिन से सूर्य की अवधि बढ़ने लगती है यानी कि दिन बड़े होने लगते है, जिससे 6 बजे सूर्योदय और शाम को 7 बजे सूर्यास्त होना स्टार्ट हो जाता है।

मकर संक्रांति के फेस्टिवल पर पूजा कैसे करते है ?

हमारे देश में रोज कोई न कोई त्योहार होता ही रहता है, और उनको मनाने का तरीका भी अलग अलग होता है, आज हम आपको मकर संक्रांति फेस्टिवल को मनाने का तरीका बताएंगे .

SR NO Makar Shankranti पर पूजा किस प्रकार करते है ?
1मकर संक्रांति के त्योहार के दिन लोग सुबह जल्दी उठ जाते है, और फिर घर की सफाई करते है, और सूर्य देव की पूजा करते है।
2पूजा में सब लोग तिली के लड्डू चढ़ाते है, और सूर्य देव से अपने और अपनों के लिए प्रार्थना करते है।
3सूर्य देव की पूजा के दौरान लोग सूर्य देव जी का बीज मंत्र भी जाप करते है, और उन्हें जल भी चढ़ाते है।
4इसके बाद घरों में पूड़ी, कचौरी, तिल के लड्डू, खिचड़ी, और मूंग की दाल के मिंगोड़ा भी बनाकर खाते है।
5मकर संक्रांति के दिन विवाहित लड़की के घर वाले उसके लिए गिफ्ट भी भेजते है।
6इसके बाद शाम के समय घरों में मिंगोड़ा की कढ़ी बनाई जाती है, जिसे करहल के नाम से भी बुलाया जाता है, यह खाने में बहुत ही अच्छी लगती है।

Makar Sankranti 2022 : का शुभ मुहूर्त क्या है ? और कितने बजे है ? और किस बेला में मकर संक्रांति की पूजा करनी चाहिए ?

दोस्तो त्योहार कोई सा भी हो लेकिन उसके पूजन और मनाने का एक निश्चित मुहूर्त अथवा समय होता है, उस समय पर पूजा करने से बहुत अच्छे फल प्राप्त होते है, इस साल मकर संक्रांति फेस्टिवल मनाने का शुभ मुहूर्त 2.45 दोपहर के से लेकर 5.45 शाम तक के बीच का ही है, हमें इसी समय में मकर संक्रांति की पूजा करनी चाहिए, इसके अलावा आप सुबह उठकर भी सूर्य देव की पूजा कर सकते है।

मकर संक्रांति त्योहार पर सूर्य देव की पूजा करने से क्या लाभ होता है ?

दोस्तो सूर्य देव की पूजा करने से लाभ ही लाभ मिलते है, लेकिन साल के इस दिन यानी कि मकर संक्रांति फेस्टिवल के दिन अगर आप सूर्य देव की पूजा करते है तो आपको बहुत सारे सकारात्मक फल प्राप्त होगा, जो कि निम्नलिखित है

SR NOजाने मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा करने से हमे क्या लाभ होते है ?
1मकर संक्रांति पर सूर्य देव की समय से पूजा करने पर आपकी चेतना बहुत उच्च स्तर पर पहुँच जाती है, जिससे आप शांत मन से सही फैसले ले सकते है।
2मकर संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा करने से हमारे अंदर एक आध्यात्मिक भावना उत्पन्न होती है, जिससे हम जीवन के सच को समझ सकते है।
3मकर संक्रांति के दिन हमें अच्छे कामो की या फिर किसी भी नए कामो की शुरुआत करनी चाहिए, ऐसा करने से आपका वह काम बहुत अच्छा जाएगा।
4मकर संक्रांति की पूजा हमेशा अपने बच्चों के सामने या फिर बच्चों के साथ करनी चाहिए, इससे आपके बच्चे समझदार और धार्मिक बनेंगे, जिससे वह कभी भी किसी गलत काम को नहीं करेंगे।
5मकर संक्रांति की पूजा करने का एक वैज्ञानिक कारण भी है, इस दिन हम सुबह उठकर सूर्य देव की घण्टो तक पूजा करते है, जिससे सूर्य की रोशनी से हमें भरपूर मात्रा में विटामिन D मिल जाता है, जो कि हमारे लिए बहुत जरूरी होता है।

भारत में अधिकांश लोग मकर संक्रांति कैसे मनाते है ?

दोस्तो एक ही त्योहार को लोग अलग अलग तरीको से, अपने रीति रिवाजों से, अपनी पीढ़ियों से चली आ रही परंपरागत तरीको से मनाते है, बिल्कुल ऐसे ही पूरे भारत में मकर संक्रांति को मनाने के तरीके अलग अलग होते है, लेकिन हम बस आपको उत्तर भारत के तरीकों के बारे में ही बताएंगे.

इस दिन सभी लोग सुबह जल्दी उठ जाते है, और अपने नहाने के पानी या जल में तिल डालकर, खासकर काले तिल डालकर नहाते है, अगर घर के पास नदी है तो लोग अपने शरीर पर तिल लगाकर नदी में नहाने जाते है, और नहाते समय सूर्य देव का स्मरण करते है, और उन्हें हाथों से जल अर्पित करते है, यह सब करने के बाद लोग अपने घरों में आते है, और गरीबो को खाने की चीजें, खिचड़ी, खाना, कम्बल, गुण, मिठाई इत्यादि दान करते है, इसके बाद घरों में सूर्य देव की कथा पढ़ी और सुनी जाती है, इसके बाद सभी लोग अपने घर की छतों पर जाकर पतंगे उड़ाते है, और पतंग उड़ाते हुए ही मिठाई खाते है, इसके बाद सभी लोग साथ में बैठकर बातें करते है, और शाम को फिर से पकवान बनाये जाते है, जिन्हें लोग खाते है, और गाँवो में दिन के समय किसान लोग झुंड बनाकर अपने खेतो से फसल काटकर घर लाते है, फिर अपनी उस काटी हुई फसल की पूजा करते है।

भारत के अलग अलग प्रदेशों में कैसे मनाते है मकर संक्रांति का त्योहार .

1. उत्तर प्रदेश व बिहार में मकर संक्रांति के दिन लोग खिचड़ी और मूंग की दाल के मिंगोड़ा खाते है, और सुबह जल्दी उठकर नदी में या नल पर नहाने जाते है।

2. पश्चिम बंगाल में मकर संक्रांति के दिन गंगा नदी पर बहुत बड़ा मेला लगता है, जिसे देखने के लिए पूरी दुनिया से लोग आते है और अपने लिए सामान लेते है और पूजा भी करते है।

3. मकर संक्रांति को तमिलनाडु में पोंगल के त्योहार के नाम से सम्बोधित किया जाता है, इस दिन सभी किसान अपने खेतों से फसल काटकर उनकी पूजा करते है।

4. मकर संक्रांति के फेस्टिवल को गुजरात में उत्तरायण के नाम से पुकारा जाता है, इस दिन सभी गुजराती भाई बहन पतंगों से खेल खेलते है। उत्तरायण पूरे गुजरात का सबसे बड़ा त्योहार है, इसीलिए वहाँ की राज्य सरकार गुजरात में 2 दिन की छुट्टी करती है, इस अवसर पर गुजरात के सभी लोग मेले में भी घूमने जाते है।

5. मकर संक्रांति को हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में मगही के नाम से सम्बोधित किया जाता है, वहाँ भी बड़े धूमधाम से मकर संक्रांति को मनाया जाता है।

6. मकर संक्रांति फेस्टिवल को सबसे ज्यादा दिन केरल में मनाया जाता है, यहाँ पर 40 दिन तक मकर संक्रांति को लोग सेलीब्रैट करते है।

7. मकर संक्रांति के त्योहार को असम राज्य में बिहू के नाम से बुलाया जाता है, इस दिन वहाँ के लोग अपने परंपरागत कपड़ें पहनते है, और पूजा करने के बाद सभी लोग मिलकर डांस करते है।

इन सबके अलावा हर राज्य में और दुनिया के अलग अलग देशों में मकर संक्रांति को अलग अलग नामों से जाना जाता है, और अलग अलग तरीको से मनाया जाता है, यदि आपको हमारे द्वारा लिखा गया लेख अच्छा लगा हो तो हमें कॉमेंट में जरूर बताना।

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नमस्कार दोस्तौ मेरा नाम गुलसन है .मे Infoinhindi का Auther हू . मे हिन्दी लेख लिख्ने मे रुचि रखता हू . दोस्तौ मै infoinhindi के माधयम से रोजाना नयी -नयी जानकारीया शेयर करता हू.

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