लोहड़ी का त्योहार (Festival) क्यों मनाया जाता है ?


दोस्तो आपने लोहड़ी( lohri festival ) के बारे में सुना तो होगा ही, या फिर मनाया भी होगा, अगर इनमें से कुछ नही किया है तो आपको लोहड़ी की छुट्टी जरूर मिली होगी, और तब आपके दिमाग में सवाल आया होगा कि यह लोहड़ी है क्या, और कहाँ पर लोहड़ी को सेलिब्रेट किया जाता है, तो दोस्तो आज के इस लेख में हम आपको लोहड़ी के इस त्योहार के बारे में पूरी जानकारी देंगे, जिसे जानने के बाद आप समझ जायेंगे की लोहड़ी किस जगह का मुख्य त्योहार (फेस्टिवल) है.


दोस्तो लोहड़ी को हमारे देश में सभी जगह मनाया जाता है लेकिन यह फेस्टिवल मुख्य रूप से सिख समुदाय के लोग ही मनाते है, और सिख समुदाय हरियाणा और पंजाब में ही पाया जाता है, इसके अलावा हमारे उत्तरप्रदेश में भी इस त्योहार को मनाया जाता है, लेकिन हमारे मनाने का तरीका कुछ अलग होता है, इस दिन पूरे देश में बड़े और बच्चे पतंगे उड़ाने का खेल खेलते है, यह खेल सुबह सर शाम तक चलता है, जिसे आपने अक्सर अपने टेलीविजन पर भी देखा होगा और यह फील भी किया होगा कि Lohri Festivals पर लोग कितनी मस्ती करते है.

लोहड़ी फेस्टिवल ( Lohri Festivals) को क्यों मनाया जाता है ?


दोस्तो हमारे देश में जितने भी त्योहार है, उन सभी को मनाने की कोई न कोई वजह होती है, इसीलिए लोहड़ी को हमारे देश के किसान लोग अपनी अच्छी फसलों को देखकर ही मनाते है, क्योंकि इस समय तक गेंहू की फसल काफी अच्छी हो जाती है, जिसकी वजह से सभी किसान खुश होते हैं और लोहड़ी को सेलिब्रेट करते है, किसानों की मान्यता के अनुसार लोहड़ी की रात साल की सबसे बड़ी रात होती है, इसके अगले दिन से ही दिन बड़े और रात छोटी होना शुरू हो जाती है और कहीं न कहीं यह बात सच भी है, क्योंकि इस दिन के बाद से ही हल्की गर्मी की शुरुआत हो जाती है.


लोहड़ी को सभी किसान व गाँव वाले लोग एक साथ मिलकर मनाते है, जिससे उनके बीच का प्यार और सहयोग की भावना भी बढ़ती है.

लोहड़ी का त्यौहार (फेस्टिवल ) कब मनाया जाता है ?


दोस्तो लोहड़ी के त्योहार को हम जनवरी के महीने की 14 तारीख को मनाते है, यह तारीख हर 100 साल में बदल जाती है, इसका मतलब है कि आने वाले 100 साल बाद लोहड़ी को हम 15 जनवरी को मनाएंगे, लोहड़ी त्योहार को हम सभी मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाते है, इस दिन से सूरज अपनी दिशा बदल लेते है, जिसे उत्तरायण भी कहा जाता है।
पंजाब में इस त्योहार को बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है और इस त्योहार को पंजाब के लोग होली के त्योहार के जैसे ही मनाते है, इस दिन वह सब लोग मिलकर सामूहिक रूप से अलाव और लकड़ी, गोबर के उपले जलाते है, फिर उसमें गेंहू की बाली को भूनते है, फिर उसे एक दूसरे को देकर बधाई देते है।
लोहड़ी त्योहार को अलग अलग नामो से भी जाना जाता है, केरल में इसे पोंगल के नाम से इसी दिन मनाया जाता है लेकिन उनके मनाने का तरीका कुछ अलग ही होता है, इसके बारे में हम आपको अपने अगले लेख में बता ही देगे.

लोहड़ी के फेस्टिवल को क्यों मनाते है, क्या इसके पीछे कुछ कहानी है ?


जी हाँ दोस्तो, लोहड़ी के त्योहार को मनाने के पीछे भी एक कहानी है, जिनमे से एक पौराणिक कथा है और दूसरी मुगलकाल की कथा, इन दोनों स्टोरी को हम आपको बताएंगे.

लोहड़ी की पहली स्टोरी


दोस्तो यह स्टोरी उस समय की है जब माता सती ने शिव जी की बात नहीं मानी थी, और जबरजस्ती करके अपने पिता दक्ष के यज्ञ में चली गयी थी, इस स्टोरी को आप सभी ने टेलीविजन पर भी देखा होगा, उस दिन माता सती ने अपने पति का अपमान देखकर आत्मदाह कर लिया था, उसके बाद शिव जी ने वहाँ आकर सब कुछ नष्ट कर दिया था और दक्ष को सजा देकर उसे बकरे का सिर लगा दिया था, इसीलिए उस दिन से सभी लोग लोहड़ी का त्योहार मनाने लगें है, इस दिन सभी लोग अपने परिवार की बेटी को अपने घर बुलाकर उपहार देते है, और श्रंगार का सामान बिंदी, सिंदूर, कपड़े आदि सुहागन स्त्रियों में बांटते है.

लोहड़ी की दूसरी स्टोरी


लोहड़ी की दूसरी स्टोरी कुछ इस तरह है, यह बात है मुगल काल की, उस समय हमारे देश पर अकबर का राज चलता था, और उन दिनों पंजाब में दुल्ला भाटी नाम के एक सरदार रहते थे जो कि बहुत साहसी और बहादुर थे, इसके साथ वह युद्ध कौशल में भी पारंगत थे, उस समय पंजाब के ही एक गाँव संदलबर में लड़कियों को बेचा और खरीदा जाता था, जब यह बात दुल्ला भाटी सरदार जी को पता लगी तो उन्हें बहुत गुस्सा आया, और वह निकल पड़े अपने नए दुश्मनों से लोहा लेने के लिए, वहाँ जाकर दुल्ला भाटी ने सभी लड़कियों को आजाद कराया, और धूमधाम से सभी की शादी कर दी, इसी वजह से पंजाब के लोग दुल्ला भाटी सरदार की याद में इस त्यौहार को मनाते है.

किस तरह से मनाते है लोहड़ी का फेस्टिवल


लोहड़ी के दिन सभी लोग एक साथ होकर आग जलाते है, फिर वहाँ पर सब लोग गीत गाते हुए नाचते है, और एक दूसरे के गले भी मिलते है, और दिन के समय सभी लोग ढोल नगाड़ों के साथ खूब शोर मचाते हुए इस त्योहार को मनाते है.
इसके अलावा 15 दिन पहले से ही घरों में गीत गाये जाने लगते है, जिन्हें लोहड़ी गीत कहते है, इसे गाँव की सभी महिलाएं मिलकर गाया करती है, और पूरी रात यह गीत गाये जाते है। लोहड़ी के गीतों को महिलाओं के अलावा बच्चे लोग भी गाते हैं.

लोहड़ी पर खेतों और फसलों का महत्व


लोहड़ी के त्योहार पर सभी किसान लोग रबी की फसलों की कटाई करके अपने अपने घरों में ले आते है, जिसकी वजह से किसानो के घरों में बहुत ही खुशियों की लहर आ जाती है, क्योंकि इन्ही फसलों को बेचकर वह अपने घर को चलाते है, लोहड़ी के त्योहार पर सभी किसान गन्ने की पहली फसल को अपने अपने खेतों में बोते है या शुरुआत करते हज, फिर उस फसल की पूजा करते है, इसके बाद पूरे खेत में गन्ने के बीज बो दिए जाते है, इसके अलावा लोहड़ी के फेस्टिवल पर मूली और सरसों की भी फसल आती है यह दोनों fasle भी mosmi ही होती है। लोहड़ी को हम सभी सर्दी की विदाई के रूप में भी मनाते है, लोहड़ी मनाने के 1 महीने के बाद ही सर्दियां खत्म हो जाती है।

लोहड़ी पर पकवान (sweet and food )


लोहड़ी के त्योहार पर बहुत सारे पकवान घरों में बनाये जाते है, जिनमे से ज्यादातर तिल के लड्डू, बाजरा के गुण वाले लड्डू, चने का साग और बाजरे व मक्का की रोटी बनाई जाती है, पंजाब में इस दिन सभी लोग रेवड़ी, गजक और मूंगफली को खाते है, और भगवान को भी अर्पण करते है।

लोहड़ी के त्योहार में आग किस लिए जलाते है ?


जैसा कि हमने आपको ऊपर ही बताया था कि लोहड़ी के त्यौहार पर किसान लोग होली के जैसे ही मिलकर आग जलाते है, और उत्सव मनाते है, यह सब लोहड़ी के 15 दिन पहले से ही शुरू हो जाता है, इसमें सभी लोग अपने मोहल्ले के एक साफ स्थान पर अपने अपने घर से लकड़ी, उपले, अलाव आदि लाकर रखते है, और इन सबका एक बड़ा सा गट्ठर बना लेते है, जिसे सब लोग मिलकर आग लगाकर गीत गाते है, उसके सब सब लोग उसी आग की परिक्रमा करते है, और आग को नमन करते है, इसके बाद सब लोग उसी आग में तापते है, और मिलकर गचक और रेवड़ी खाते है, और एक दूसरे के गले भी मिलते है, इस तरह से लोहड़ी के दिन सभी लोग साथ रहते है, और अपने आपसी मतभेद को भुला देते है।
किसान लोग लोहड़ी के दिन को ही अपना नया साल मानते है, यह वह किसान है जो सिख समुदाय से जुड़े होते है या फिर सिख ही होते है, यह किसान पंजाब और हरियाणा में ही पाए जाते है जो कि लोहड़ी को अपना नया साल मानते है.

लोहड़ी का वर्तमान स्वरूप या डिजिटल लोहड़ी .


लोहड़ी के वर्तमान रूप को देखते हुए हम, लोहड़ी को डिजिटल लोहड़ी भी कह सकते है, यह सब हुआ है टेक्नोलॉजी के बहुत ज्यादा तरक्की करने की वजह से, डिजिटल लोहड़ी को अब सब लोग घर बैठे ही मोबाइल से एक दूसरे को विश करते हुए मनाते है।, वैसे देखे तो लोहड़ी का यह रूप पहले से बहुत ही खराब है, लोग अपने आलस की वजह से इस त्योहार को सही से नहीं मनाते है।

लोहड़ी त्योहार की कुछ मुख्य विशेषताएं

SR NOLohri Festival के कुछ मुख्य विशेषताएं
1लोहड़ी त्योहार सिख समुदाय का एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है, इसे पूरा सिख समुदाय बहुत ही धूमधाम से सेलिब्रेट करता है, लोहड़ी फेस्टिवल को जनवरी की सर्दियो में ही मनाया जाता है।
2लोहड़ी त्योहार अकेले भारत में ही नही अपितु पूरी दुनिया में मनाया जाता है, जहाँ भी सिख समुदाय के लोग होंगे, वहाँ लोहड़ी को मनाया ही जायेगा।
3लोहड़ी का फेस्टिवल सभी लोगो के अंदर एक अलग ही तरह का उत्साह और ऊर्जा उत्पन्न कर देता है, जिसकी वजह से लोग इस त्यौहार का बेसब्री से इंतजार करते है।
4लोहड़ी के दिन पूरे भारत में अवकाश रहता है, जिसकी मुख्य वजह यह है कि सभी लोग लोहड़ी को अपने घर में अपने परिवार और दोस्तो के साथ धूमधाम के साथ मना सके।
5लोहड़ी के त्योहार के दिन लोग सुबह के नाश्ते में रेवड़ी और गजक और मूंगफली खाते है, इसके बाद घर में सरसों का साग और मक्के की रोटी बनाई जाती है, और तिली के लड्डू बनाये जाते है, जिसे सब लोग मिलकर खाते है।

Frequently Asked Questions About lohri festivals

Who celebrates Lohri festival?

Hindu and Sikhs Celeberated lohri festival

When Is Lohri Celeberated In 2022?

13 January lohri is celebrated in 2022

Which Crop Cut In Lohri ?

Rabi Crops cuts in lohri

Conclusions

दोस्तौ आज हमने आप सभी लोगो को Lohri Festival के बारे मे ज्यादा से ज्यादा जानकारि दी है. दोस्तौ यदि आप लौग Lohri festival के बारे मे कौइ और जानकारि लेना चाहते है तोह आप हमे कमेंट करे. दोसतो आप सभी लोगो का हमरे साथ अन्त तक बने रहने के लिये धन्यवाद.

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