पर्व और त्योहार

बसन्त पंचमी 2022 ( विद्या का त्यौहार )

दोस्तो जब हम छोटे बच्चे हुआ करते थे, तब हमें सिखाया गया था कि किताबों में विद्या होती है, इसीलिए हमें हमेशा किताबो का सम्मान करना चहिये, अगर हम ऐसा नही करते है तो सरस्वती माँ हमसे नाराज हो जाएगी, और हम कुछ भी पढ़ लिख नही पाएंगे.
दोस्तो ऊपर लिखे वाक्य में आपने एक चीज तो नोटिस की ही होगी कि भला विद्या से माता सरस्वती का क्या नाता, तो दोस्तो नाता है क्योंकि देवी माँ सरस्वती ही विद्या की देवी है, जैसे हमारे हिन्दू धर्म में हर एक देवी देवता को अपनी खास बात या गुण की वजह से जाना जाता है, बिल्कुल वैसे ही देवी सरस्वती को विद्या की देवी माँ कहा जाता है.


क्या है Basant Panchami ?


दोस्तो बसंत पंचमी को हम सरस्वती जयंती के नाम से भी जानते है, क्योंकि इस दिन को हम सरस्वती माता के जन्मदिन के नाम से भी जानते हैं। इसी दिन माता सरस्वती का अवतरण इस ब्रह्मांड में हुआ था, यह कथा हमारे वेद पुराणों के अनुसार है, बसन्त पंचमी के दिन हम सभी माता सरस्वती की पूजा करते है, इस दिन भारत के सभी विद्यालयों में देवी माता सरस्वती की पूजा होती है। बसन्त पंचमी त्योहार के दिन सभी लोग अपने किताबो, पेन आदि की पूजा करते है, और उनसे ज्ञान का वरदान माँगते है कि हमें हर चीज का ज्ञान हो जाये। हमारे देश के वेस्ट बंगाल राज्य में बसन्त पंचमी बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है, इस दिन से बसंत का मौसम यानी कि बसंत ऋतु शुरू हो जाती है, जिससे सर्दी कम हो जाती है, और गर्मी का मौसम शुरू होने लगता है, इसी अवधि पर जंगलों के पेड़ एंड पौधे अपने अपने पत्ते नीचे गिरा देते है जो कि बसंत पंचमी के दिन उन पर नए पत्ते आ जाते है, जिससे वातावरण बहुत ही अच्छा लगने लगता है, सभी तरफ हरियाली ही हरियाली होती है.


2022 में कब है बसन्त पंचमी का त्यौहार ?


दोस्तो बसन्त पंचमी का त्यौहार हर साल माघ महीने की पांचवी तारीख को मनाया जाता है, इसे संस्कृत में पंचमी तिथी भी कहते है, इस साल बसन्त पंचमी का त्यौहार फरवरी के महीने में है। बसन्त पंचमी का त्योहार इस साल 5 फरवरी के दिन सुबह 7 बजे से दोपहर के 12 बजे तक ही मनाया जाएगा, यही इसका शुभ मुहूर्त भी है। इसी अवधि में सभी बच्चे और अध्यापक माता सरस्वती की पूजा करेगें। इसी दिन से हमारे देश में बसंत ऋतु शुरू हो जाती है, और बसन्त ऋतु में बहुत सारे त्योहार मनाए जाते है जिनकी सूची निम्नलिखित है.

SR NO बसन्त ऋतु में मनाए मनाए जाने त्योहार
1तिल चौथ या तिल चतुर्थी
2Shashthila ekadashi व्रत
3मौनी अमावस्या
4गणेश जयंती त्योहार
5गुरु रविदास जयंती अथवा माघ पूर्णिमा

इसके अलावा और भी बहुत से त्यौहार है जो इस मौसम में आते है, लेकिन इन सभी त्योहारों को हम मनाते नहीं है।


Importance of Basant Panchami


दोस्तो हमारे देश में मनाए जाने वाले त्योहारों की कोई न कोई भूमिका होती ही है, बिल्कुल ऐसे ही बसंत पंचमी त्योहार की भी हमारे देश में भूमिका है, यह त्योहार बसंत ऋतु के पहले दिन मनाया जाता है, इस दिन से मौसम में इतना बदलाव आ जाता है, की न तो आपको ज्यादा सर्दी लगेंगी और न ही ज्यादा गर्मी, दूसरे शब्दों में कहे तो इस दिन से अगले 28 दिन तक पूरे भारत की जलवायु या मौसम सम हो जाता है, यानी कि वातावरण में एक अलग रूहानी अहसास आ जाता है। इस ऋतु के शुरू होने से सभी पेड़ पौधे हरे भरे और रंग बिरंगे हो जाते है, जिन्हें देखने से सभी का मन खुश हो जाता है। यही महत्व है बंसत पंचमी का जिसे आप अच्छे से समझ गए होंगे।


बसंत पंचमी के दिन हम पीले रंग को ही प्राथमिकता क्यों देते है ?


दोस्तो हमारे देश में हर त्योहार का अलग अलग मतलब और महत्व होता है , और उनका रंग भी अलग होता है, बिल्कुल ऐसे ही बसंत पंचमी के त्यौहार पर हम सभी पीले रंग को ज्यादा महत्वता देते है क्योंकि इस दिन पूरी दुनिया में हरा और पीला रंग ही छा जाता है, जैसे कि इसी ऋतु में हमारे देश के खेतों में सरसों के पीले फूल लग जाते है जो कि देखने में बहुत सुंदर लगते है, इसके अलावा बिहार राज्य में और पूर्वी उत्तर प्रदेश में पीले रंग की महुआ भी लग जाती है जो कि बहुत ही खुशबूदार होती है, इसका उपयोग वैद्य लोग दवा बनाने में करते है, और नशेड़ी लोग शराब बनाने में। लोगो के अनुसार इसी दिन से खेतों में रंग बिरंगी तितलियाँ भी उड़ने लगती है, जिससे खेत और भी सुंदर लगने लगते है.


भारतवर्ष मे कैसे मनाते है बसंत पंचमी का त्यौहार ?


दोस्तों अगर आपने कभी बसंत पंचमी का त्योहार मनाया होगा तो आपको पता ही होगा कि इस दिन हम क्या क्या करते है, अगर नही पता है तो हम बता देते है.

Sr No भारतवर्ष मे कैसे मनाते है Basant Panchami का त्यौहार
1बसंत पंचमी के त्योहार के दिन हम सभी सुबह जल्दी उठ जाते है, उसके बाद अपने घरों की थोड़ी बहुत सफाई करके, अपनी किताबों को सेट कर लेते हैं, उसके बाद हम सभी जल्दी नहा लेते हैं, यह सब काम हमें सूरज निकलने से पहले ही करना होता हैं।
2इसके बाद हम सभी बागान से या बगीचे से पीले रंग के फूल तोड़कर लाते है, जिनसे हम माता सरस्वती जी की पूजा करते है.
3इसके बाद हम सभी लोग, अपने घर के मंदिर में अपनी किताबो को रखकर माता सरस्वती देवी जी से बोलते हैं कि माता हमें विद्या का वरदान दो, हमें हमारे सबसे कमजोर विषय में होशियार कर दो।
4यह सभी पूजा व पाठ हम लोग पीले कपड़े पहनकर ही करते है।
5इसके बाद जो लोग गरीबो को दान देने में सक्षम होते है, वो लोग दान भी करते है।
6इसके अलावा हमारे देश के गुजरात नामक राज्य में बसंत पंचमी के त्योहार पर गरबा नामक डांस किया जाता है।
7गुजरात के अलावा हमारे देश के एक और राज्य पंजाब में लोग पूजा करने के बाद पतंग उड़ाने का खेल खेलते है, जिसे वहीं के पूर्व राजा महाराजा रणजीत सिंह जी ने शुरू किया था।
8बसंत पंचमी के त्यौहार को मुस्लिम भाई लोग भी मनाते है, बस उसका नाम बदल लेते है, यह त्योहार अक्सरकर सूफी जगहों पर ही मनाया जाता है।
9इसके अलावा हमारे देश के अलाहाबाद यानी की प्रयागराज में एक शाही स्न्नान का आयोजन भी किया जाता है, इस दिन यहाँ पर बहुत भीड़ भाड़ होती है कि जो कि यहाँ नहाने आयी होती है।
10इसके अलावा बसंत पंचमी के त्यौहार पर बहुत जगह मेले भी लगते है, जहाँ से लोग अपनी पसंद की चीजें खरीद लेते है, इससे बहुत लोगो को रोजगार भी मिलता है।

बसंत पंचमी मनाये जाने के पीछे कुछ कहानियां

सरस्वती जयंती की स्टोरी

दोस्तो जब हमारे ब्रह्मांड का सृजन हो रहा था, तब सभी देवी देवता एक ऐसी दुनिया बनाना चाहते थे, जहाँ के लोग ज्ञानी हो, और ब्रह्मा जी ने हमारी दुनिया को बना दिया था, लेकिन तब हमारी यह दुनिया आवाज और शब्दों से रहित थी, बिल्कुल जीरो आवाज की मूवी के जैसे, यह समस्या बहुत ही गंभीर थी, तब ब्रह्मा जी की पत्नी सरस्वती जी न उन्हें सुझाब दिया कि हमे अब हमारी एक संतान का निर्माण करना चाहिए, जो कि हमारी बनाई गई दुनिया को स्वर देगी, इसके बाद ब्रह्मा जी ने अपनी शक्ति से एक पुत्री का निर्माण किया जिनके हाथ मे वेद और वीणा थी, हालांकि ब्रह्मा जी ने अपनी पत्नी सरस्वती की सलाह पर यह काम किया था, इसीलिए उन्होंने अपनी इस पुत्री का नाम भी सरस्वती ही रखा, इसके बाद ही जैसे सरस्वती माता ने अपनी वीणा बजाई तो पूरी दुनिया मे स्वर आ गए, सभी लोगों को वाणी मिल गयी थी।

इसीलिए दोस्तों हम सभी बसंत पंचमी के इस त्योहार को सरस्वती जयंती के नाम से जानते हैं, यह बात हमने आपको ऊपर भी बताई थी।

बसंत पंचमी के त्योहार की दूसरी कथा

दोस्तो यह कथा रामायण काल की है, उस समय धरती पर भगवान विष्णु के अवतार अयोध्या नंदन श्री राम थे, यह कथा उनसे ही जुड़ी हुई है, जब रावण में माता सीता का धोखे से किडनेप कर लिया था, तब राम जी और उनके छोटे भाई लक्ष्मण जी दोनों ही वन वन भटक रहे थे, और इसी बीच दोनों भाई मतंग ऋषि के आश्रम में पहुँचे, जहाँ पर उन्हें शबरी नाम की बूढ़ी स्त्री मिली थी, जो कि राम जी की बहुत बड़ी भक्त थी, वह सालों से राम जी का wait कर रही थी, और उनके लिए जंगलों से रोज मीठे बेर चुनकर लाती थी, जब राम जी उस आश्रम में पहुँचे तो उन्होंने शबरी की भक्ति से प्रसन्न होकर उसके झूठे बेर खाये, इसके बाद शबरी को नवधा भक्ति का ज्ञान दिया, इसके बाद शबरी का जीवन धन्य हो गया, और उसने अपनी देह त्याग कर दी, और जाते जाते राम जी को उनकी अगली मंजिल के बारे में बता दिया था.

निष्कर्ष

तो दोस्तो आज के हमारे इस लेख को पढ़ने के बाद आपकी बहुत सारी गलतफहमी दूर भी हो गयी होगी जैसे कि ब्रह्मा जी ने अपनी बेटी सरस्वती से विवाह किया था, लेकिन ऐसा नही था, इस बात का खंडन हमने इस लेख में कर ही दिया है, इसके अलावा आपको हमारे इस लेख में कौन कौन सी बातें सबसे अच्छी लगी, हमे कॉमेंट करके जरूर बताना।

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