पर्व और त्योहार

Holi 2022: 18 या 19 मार्च, कब मनाई जाएगी होली? जानें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

Holi 2022 : दोस्तो त्योहारों की इस कड़ी में हम आपके लिये फिर से लेकर आये है हमारे एक और बड़े त्यौहार की सभी जानकारी और उसे मनाने का तरीका और उसका इतिहास, जी हाँ हम यह सभी आपको बताएंगे, लेकिन उससे पहले बात दे कि भारत का यह सबसे बड़ा त्योहार कौन सा है, तो आपको बता दे कि भारत का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार होली है. जो कि हर साल मार्च के महीने में ही मनाया जाता है, इस दिन के बाद से मौसम ही बदल जाता है, और सर्दी बिल्कुल खत्म हो जाती है और गर्मी का मौसम शुरू हो जाता है।

दोस्तों होली फेस्टिवल के बारे में आप सभी जानते होंगे कि इस त्यौहार को हम सब किस तरह से मनाते है, अगर नही जानते तो हम आज के इस लेख होली फेस्टिवल के बारे में आपको सभी जानकारी देंगे।

होली को हम सभी रंगों का त्यौहार कहते है और मानते भी है और आजमाते भी है, क्योंकि इस दिन हम सभी लोग सुबह से शाम तक रंग में ही सने रहते है, अगर किसी ने गलती से भी खुद को साफ कर लिया तो उसे रंग लगा कर फिर से पहले जैसा ही कर दिया जाता है। इस दिन सब लोग आपस मे गले मिलते है, बड़ो का आशीर्वाद लेते है।
Diwali  के जैसे ही होली का भी फेस्टिवल 2 से 3 दिन का होता है।

कैसे मनाया जाता है होली फेस्टिवल

दोस्तो हम नीचे दिए गए चरणों मे होली का त्यौहार मनाने की पूरी जानकारी क्रम के अनुसार देगें

sr No How We Are Celebrating Holi In Hindi
1 दोस्तो होली आने के 15 दिन पहले से ही होली की तैयारी शुरू हो जाती है, होली के 15 दिन पहले हम सब लोग घरों में गाय के गोबर के उपले बनाते हैज़ क्योंकि इन ही उपलों को हम होलिका दहन पर जलाते है।
2 जब होली आने पर 8 दिन बचते है तब होली आठे नाम का त्योहार मनाया जाता है, इस दिन घरों में मिठाई बनती है, और इसी दिन से होलिका दहन की नींव रख दी जाती है, यानी कि इसी दिन से सब लोग लोहड़ी त्योहार के जैसे अपने अपने खेतों, घरों से कुछ कुछ लकड़ी लेकर मोहल्ले की एक साफ जगह रखी जाती है, जिसे होली की रात जलाया जाता है, यह सब काम सब लोग मिलकर ही करते है।
3 जब होली आने में 7 दिन बचते है तो सब लोग अपने अपने घरों की सफाई करते है, और घरों में पुताई भी करते है।
4 जब होली आने में 6 दिन बचते है तो सभी के घर में दूध का खोया बनाया जाने लगता है, जिससे घरों में चावल के अहिरसे, खोए की गुजिया, हलवा, दही बड़ा जैसे पकवान बनाये जाते है, जिसे होली के दिन पूजा करने के बाद सब लोग मिलकर खाते है।
5 होली के एक दिन पहले यानी कि होलिका दहन की रात को लोग होली का दहन करते है यानी कि होली को जलाते है, और जयकारा लगाते है होली माता की जय, पूरी पिचकिया छः, और फिर होली माता पर प्रसाद चढ़ाया जाता है, जिसे बाद में बच्चों को दे दिया जाता है।
6 दोस्तों इसके बाद लोग कपड़े उतारकर होली की आग में खुद के शरीर को तपाते है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो भी होली की आग में बैठता है, उसे साल भर तक कोई बड़ी बीमारी नहीं होती है, इसके बाद होली की आग में गन्ने को सेंका जाता है, जिसे सुबह खाया जाता है, ऐसा करने से साल भर आपके दांत मजबूत रहते है।
7 इसके बाद होली की सुबह सब लोग अपने अपने मोहल्ले में बाहर घूमने के लिए निकलते है, और सभी जानने पहचानने वाले को रंग लगा देते है, और साथ में जौ की बलिया भी देते है।
8 इसके बाद लोग नहा धो कर मिठाई खाते है, और घरों में पकवान बनाये जाते है जिन्हें सब लोग खुद भी खाते है और अपने दोस्तों को भी खिलाते है।
9इसके बाद पूरे दिन तक रंगों का यह खेल चलता ही रहता है, होली के अगले दिन दौज होती है, इस दिन बहन लोग अपने भाई को मिठाई खिलाती है और बदले में उनसे गिफ्ट भी लेती है, इसके अगले दिन होली की परवा होती है उस दिन सब लोग अपने अपने घरों में ही रहते है, उस दिन घर से या जेब से पैसे खत्म नही किये जाते है और न ही किसी को उधार दिया जाता है।

तो दोस्तो यह था होली त्योहार को मनाने के कुछ प्रमुख चरण, इसके अलावा होली के दिन गाँवो में फ़ाग भी गाई जाती है, जिसे अक्सर पुरुष लोग गाते है।

2022 में किस दिन और कब है होली का त्यौहार

दोस्तों इस साल यानी कि 2022 में होली का त्यौहार या फेस्टिवल फाल्गुन महीने की पूर्णिमा यानी कि 18 और 19 मार्च के दिन है, इसी दिन होली फेस्टिवल मनाया जाएगा। 2022 की इस साल में होली का मुहूर्त यानी कि होलिका दहन का मुहूर्त जो कि बहुत शुभ है, इस साल 18 मार्च की रात 9 बजकर 20 मिनट से लेके 10.30 तक ही होलिका दहन का अच्छा मुहूर्त है क्योंकि इसके बाद भद्रा लग जायेगी और उस समय में होली नही जलाई जाती है।

इसे भी पढे : Phulera dooj : 2022 मे किस दिन मनाया जाएगा फुलेरा दूज का त्यौहार.

होली की एक पौराणिक स्टोरी

दोस्तो हमारे हिन्दू धर्म में जितने भी त्योहार मनाए जाते है, उन सभी को मनाने के पीछे कोई न कोई स्टोरी जरूर होती है, बिल्कुल इसी तरह भारत के दूसरे सबसे बड़े त्योहार होली को मनाने के पीछे भी एक बहुत ही अच्छी स्टोरी है जो कि इस तरह है


दोस्तो होली की यह कहानी उस समय की है जब इस दुनिया में सतयुग चल रहा था, का समय इस धरती पर भगवान विष्णु का या फिर किसी भी देव का अवतार नही हुआ था, और धीरे तो सब चल ही रहा था कि एक दिन हिरण्यकश्यप नाम के एक दैत्य ने जन्म लिया और वह शुरू से ही भगवान विष्णु से बहुत ज्यादा नफरत करता था, इसके बाद उसने बहुत सालों तक हिमालय पर्वत पर खड़े रहके घोर तप किया, यह तप ब्रह्मा जी के लिए किया गया था, जिससे खुश होकर ब्रह्मा जी उसे अमर रहने का वरदान देदे।
बहुत सालों की तपस्या करने के बाद जब उसके तप का प्रभाव ब्रह्म लोक तक आने लगा, तब ब्रह्मा जी उस दैत्य के सामने आए और बोले कि मांगो तुमको क्या चाहिए, इसके बाद उस हिरण्यकश्यप न उनसे अमर रहने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्मा जी ने उसे यह वरदान देने से मना कर दिया और बोला कि इसके अलावा और कुछ मांग लो, इसके बाद उस दुराचारी ने बड़ी ही चालाकी से वरदान मांगा की उसे न तो किसी हथियार से मारा जा सके, न किसी अस्त्र से , न किसी शस्त्र से, न जमीन में, न आसमान में, न हवा में न पानी में, न दिन में , न रात में, न सुबह, न शाम, न सर्दी में, न गर्मी में, न देवताओं द्वारा, न जानवरो द्वारा, न ही मनुष्यों द्वारा, न ही त्रिदेवो के द्वारा, उसे इनमें से कोई भी न मार सके, और ब्रह्म जी न उस दुष्ट को यह वरदान दे दिया और अपने लोक को चले गए, 

इसके बाद वह दैत्य ने आकर खबर दी कि अब वह पूरी दैत्य जाती का नया राजा है जिसे कोई भी नही मार सकता वह अब अमर है, और उसने पूरी दुनिया में कोहराम मचा दिया, इसके बाद उसने एक एक करके सभी लोको को अपने अधीन कर लिया और सब देवता स्वर्ग लोक से बाहर निकाल दिए गए, फिर सब लोग भगवान शिव जी के पास गए कि इस समस्या से हमें निदान दिलाये, लेकिन शिव जी के पास भी इस समस्या का कोई तोड़ नही था तब उन्होंने कहा कि इस समस्या को बस श्री हरि विष्णु जी ही खत्म कर सकते है, उसके बाद सब लोग भगवान विष्णु के यहाँ गए, तब विष्णु जी ने अपनी लीला शुरू की, उस दैत्य हिरण्यकश्यप की पत्नी कयाधु के गर्भ में अपने भक्त को भेज दिया, और वह दैत्य यह सोचकर खुश होता रहा कि अब वह और उसका पुत्र मिलकर is पूरी दुनिया पर राज करेंगे लेकिन ऐसा नही हुआ, जब उस दैत्य के पुत्र न जन्म लिया तो उसका नाम प्रह्लाद रखा गया, प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु जी के परम भक्त थे, वो जहाँ भी जाता था बस हरि हरि ही कहता रहता था, उसके पिता ने सोचा कि अभी प्रह्लाद बचपन में है इसीलिए वो ऐसा करता है, इसीलिए उसे गुरुकुल भेजा गया, लेकिन प्रह्लाद बस एक ही भगवान को मानते थे कि बस हरि ही सब कुछ है, उसके पिता भगवान नही है, और उसने पूरे आश्रम के बच्चों को बदल दिया.

जब यह बात उस दैत्य हिरण्यकश्यप को पता लगी तो उसे बहुत गुस्सा आया और उसने अपने पुत्र को मारने का आदेश दे डाला, लेकिन कोई भी प्रह्लाद को नही मार पाया, उसे हर बार भगवान विष्णु बचा लेते है, इसीलिए अबकी बार उस दैत्य ने अपनी बहन होलिका को बुलाया, होलिका को वरदान था कि वह आग में नही जल सकती है, इसलिए वह प्रह्लाद को लेके बैठ गई आग में, लेकिन वह भी भगवान विष्णु ने प्रह्लाद को बचा लिया और होलिका के वरदान की अवधि खत्म कर दी, और होलिका जलकर मर गयी, इसीलिए लोग होलिका का हर साल दहन करते है, और उत्सव मनाते है।

निष्कर्ष –

तो दोस्तो आपको आज का हमारा यह लेख कैसा लगा, और हमारे द्वारा बताई गई स्टोरी कैसी लगी हमें कॉमेंट करके जरूर बताना, और इस स्टोरी में उस दैत्य का अंत भगवान विष्णु के अवतार नरसिंह जी ने किया था जो कि आधे सिंह थे और आधे इंसान, उन्होंने बिना किसी हथियार के अपने नाखूनों से उस दैत्य का काम तमाम कर दिया था।

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